पटना: जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था में कटौती को लेकर बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि पहले उन्हें वाई-प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन बिहार लौटने के बाद उनकी सुरक्षा घटाकर केवल एक सुरक्षाकर्मी तक सीमित कर दी गई। इसके विरोध में उन्होंने वह सुरक्षा भी वापस कर दी।
पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेज प्रताप ने कहा कि उन्हें अब किसी सरकारी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है। हालांकि उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में उनकी जान को कोई खतरा होता है या उन पर हमला होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी बिहार सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की होगी।
तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा में बिना किसी स्पष्ट कारण के कटौती की गई है। उनका कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक नेता की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी होती है, लेकिन उनके मामले में यह जिम्मेदारी निभाई नहीं गई।
उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण राज्य की आम जनता, खासकर महिलाओं की सुरक्षा है। तेज प्रताप ने कहा कि अगर बिहार की महिलाएं सुरक्षित हैं तो वही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा मानी जाएगी।
सुरक्षा वापस करने के उनके फैसले के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था में कथित भेदभाव के खिलाफ विरोध का प्रतीक है, जबकि राजनीतिक गलियारों में इसे सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
हाल के दिनों में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा में बदलाव को लेकर भी राज्य की राजनीति गरमाई हुई है। ऐसे माहौल में तेज प्रताप यादव का यह बयान और सुरक्षा लौटाने का फैसला राजनीतिक चर्चाओं का नया विषय बन गया है।